Please wait
हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आई टाटा सुमो, 13 लोगों की मौत, दो घायल Sudhir wins historic सरकार के साथ वार्ता के बाद सीजेपी बोली- प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं Sudhir wins historic सरकार के लिखित आश्वासन पर 26 दिनों बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन Sudhir wins historic पेपर लीक मामलों के लिए गठित होंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट : प्रधानमंत्री Sudhir wins historic असम में बाढ़ से हालात गंभीर, 11 जिलों की 653164 आबादी प्रभावित, मृतकों की संख्या 44 हुई Sudhir wins historic टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित Sudhir wins historic चर्चा रोकने के लिए शर्तें रखना ठीक नहीं, सरकार किसी मुद्दे से भागती नहीं': किरेन रिजिजू Sudhir wins historic विपक्ष के हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित Sudhir wins historic सिक्किम टनल हादसा: मृतकों की संख्या बढ़कर हुई 10, ज़हरीली गैस-खराब मौसम के बीच बचाव कार्य जारी Sudhir wins historic यूक्रेन से रवाना वाणिज्यिक पोत पर हमले में चार भारतीयों की मौत, भारत ने रूस के प्रभारी राजदूत को किया तलब Sudhir wins historic

शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर युवाओं का भविष्य छीना, छात्रों पर दमन से सरकार ने लोकतंत्र को शर्मसार किया : सोनिया गांधी

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने, सार्वजनिक शिक्षा को पीछे धकेलने, परीक्षा प्रणाली को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का शिकार बनाने तथा छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने का आरोप लगाया है।

24 Jul 2026

शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर युवाओं का भविष्य छीना, छात्रों पर दमन से सरकार ने लोकतंत्र को शर्मसार किया : सोनिया गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने, सार्वजनिक शिक्षा को पीछे धकेलने, परीक्षा प्रणाली को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का शिकार बनाने तथा छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 152 प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और जवाबदेही से सरकार के लगातार बचने ने देश के छात्रों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। छात्रों की जायज मांगों का जवाब संवाद से नहीं, बल्कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और दमन से दिया गया, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सोनिया गांधी ने शुक्रवार को एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित अपने लेख ‘शिक्षा व्यवस्था का पतन और युवा भारत की त्रासदी’ में कहा कि पिछले कुछ सप्ताह से देशभर के छात्र प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था के पतन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगें केवल जवाबदेही तय करने और शिक्षा सुधार लागू करने की हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय उनके साथ क्रूर व्यवहार किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए। घर लौट रहे छात्रों तक को नहीं बख्शा गया और उनके सिर व पीठ पर लाठियां बरसाई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पेलेट के इस्तेमाल की अनुमति भी केंद्रीय गृह मंत्री के स्तर पर दी गई होगी। उस दिन के दृश्य पूरे देश की सामूहिक चेतना को झकझोरने वाले थे।

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार संवाद की बजाय हिंसा को प्राथमिकता देती है। किसानों के आंदोलन से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक और अब छात्रों के साथ भी यही रवैया अपनाया गया है। भविष्य के डॉक्टरों, इंजीनियरों, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और उद्यमियों के साथ संवाद स्थापित करने के बजाय सरकार ने उनके खिलाफ राज्य की दमनकारी ताकत का इस्तेमाल किया, जिसे न भुलाया जा सकता है और न ही माफ किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने हर विरोध को राष्ट्रविरोधी बताने की पुरानी रणनीति को छात्र आंदोलन पर भी लागू करने का प्रयास किया। छात्रों की वास्तविक समस्याओं पर आत्ममंथन करने के बजाय सरकार ने उन पर साजिश और राजनीतिक प्रेरणा के आरोप लगाने शुरू कर दिए।

लेख में सोनिया गांधी ने सार्वजनिक शिक्षा के कमजोर होने को संकट की पहली बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने स्कूल शिक्षा पर कुल बजट व्यय का हिस्सा 50 प्रतिशत तथा उच्च शिक्षा पर 23 प्रतिशत तक घटा दिया। पिछले 12 वर्षों में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए, जबकि 43 हजार निजी स्कूल खोले गए, जिनमें बड़ी संख्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों द्वारा संचालित हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों की अनुदान राशि घटाकर उन्हें कर्ज लेने के लिए मजबूर किया, जिसके कारण सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को फीस बढ़ानी पड़ी।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सस्ती सार्वजनिक शिक्षा की उपलब्धता घटने के कारण परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। केवल नीट परीक्षा की कोचिंग पर भारतीय परिवार जितनी राशि खर्च कर रहे हैं, वह लगभग केंद्र सरकार के कुल सार्वजनिक शिक्षा बजट के बराबर है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अत्यधिक दबाव पड़ा है और छात्रों पर सफलता का असहनीय मानसिक बोझ बढ़ गया है।

सोनिया गांधी ने परीक्षा प्रणाली को भी गंभीर संकट का कारण बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्र परीक्षा प्रणाली समाप्त कर उसे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से अत्यधिक केंद्रीकृत कर दिया गया। एनटीए स्वयं संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रही संस्था है, जो निजी ठेकेदारों पर निर्भर है। प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञ देश के शीर्ष शिक्षाविद नहीं, बल्कि राजनीतिक संबंध रखने वाले साधारण लोग हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में 152 प्रश्नपत्र लीक हुए, जिनमें एनटीए के गठन के बाद उसके माध्यम से आयोजित नौ परीक्षाओं में भी प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं हुईं।

उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में सफलता प्राप्त करना भी लगातार कठिन होता जा रहा है। स्नातक युवाओं में बेरोजगारी पिछले कुछ वर्षों से औसतन 40 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। गुणवत्तापूर्ण नौकरियों की कमी, विश्वविद्यालयों में राजनीतिक आधार पर कुलपतियों और शिक्षकों की नियुक्ति तथा पाठ्यक्रमों का समयानुकूल आधुनिकीकरण न होने से छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नई अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हो पा रहे हैं।

सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसे संसद में व्यापक चर्चा और सर्वसम्मति के बिना लागू किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए को भी संसद के प्रति जवाबदेह बनाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों की सार्वजनिक रूप से अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि इतनी गंभीर विफलताओं के बावजूद उनका पद पर बने रहना जनाक्रोश को और बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज का छात्र आंदोलन देश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था, बढ़ते भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकार की जवाबदेही से लगातार बचने की प्रवृत्ति का स्वाभाविक परिणाम है। सरकार ने न केवल देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है, बल्कि सत्ता के अहंकार और असंवेदनशीलता को भी अपनी कार्यशैली बना लिया है। देश के छात्रों ने सरकार के दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है और उनके साथ खड़ा होना देश का नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक दायित्व है।

Ad Image
Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर युवाओं का भविष्य छीना, छात्रों
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने, सार्वजनिक शिक्षा को पीछे धकेलने, परीक्षा प





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News